संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 — 'जेल में रहने पर पद से हटाना' कानून के विरुद्ध सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का वक्तव्य

 प्रेस विज्ञप्ति

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, सांसद, पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र, बिहार


दिनांक: 02 जुलाई, 2026


 


विषय: संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 — 'जेल में रहने पर पद से हटाना' कानून के विरुद्ध सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का वक्तव्य



पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया है। यह विधेयक प्रावधान करता है कि यदि प्रधानमंत्री, कोई मुख्यमंत्री अथवा कोई मंत्री ऐसे गंभीर अपराध के आरोप में, जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा हो सकती है, गिरफ्तार होकर लगातार तीस दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे इकतीसवें दिन स्वतः पद छोड़ना होगा।


सांसद पप्पू यादव ने निम्नलिखित बिंदुओं पर सरकार को घेरते हुए कहा:


•  दोष सिद्ध हुए बिना दंड — यह प्रावधान न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि पर नहीं, केवल पुलिस हिरासत पर आधारित है। तीस दिनों में अधिकांश मामलों में आरोप-पत्र तक दाखिल नहीं हो पाता, आरोप तय होना तो दूर की बात है। यह "जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक निर्दोष" के मूल संवैधानिक सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है।

•  राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार — केंद्र सरकार अपनी जांच एजेंसियों (ईडी, सीबीआई) के माध्यम से किसी भी विपक्षी मुख्यमंत्री अथवा मंत्री को कमजोर आधार पर तीस दिनों तक हिरासत में रखवाकर, बिना किसी जनादेश अथवा मतदान के, उसकी निर्वाचित सरकार को गिरा सकती है।

•  संघीय ढांचे पर आघात — राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हटाने की शक्ति व्यावहारिक रूप से राज्यपाल के माध्यम से केंद्र के हाथों में चली जाती है, जिससे राज्यों की चुनी हुई सरकारों की स्वायत्तता गंभीर रूप से प्रभावित होती है।

•  न्यायिक व्यवस्था की धीमी गति का दुरुपयोग — देश की अदालतों में जमानत मिलने में ही महीनों लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में तीस दिनों की हिरासत किसी भी निर्दोष जनप्रतिनिधि के साथ हो सकती है, जिसका सीधा लाभ सत्तापक्ष उठा सकता है।

•  दोहरा मापदंड — जब तक कोई विधायक अथवा सांसद दोषी सिद्ध नहीं होता, वह चुनाव लड़ सकता है और सदन की सदस्यता बरकरार रखता है। फिर केवल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री पद के लिए ही यह असाधारण रूप से कठोर नियम क्यों?

•  भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल — एक बार यह कानून बन जाने पर, चाहे किसी भी दल की सरकार हो, इसका प्रयोग भविष्य में विपक्ष के विरुद्ध राजनीतिक हथियार के रूप में किया जाता रहेगा, जिससे देश की लोकतांत्रिक परंपराएं स्थायी रूप से कमजोर होंगी।

सांसद पप्पू यादव ने कहा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जेल से सरकार चलाने की घटना को आधार बनाकर लाया गया यह विधेयक वास्तव में सत्तापक्ष को भविष्य में विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने का एक संवैधानिक औजार देने का प्रयास है। उन्होंने मांग की कि यह विधेयक संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) की समीक्षा में इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करे तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप, दोषसिद्धि को ही पद हटाने का आधार बनाया जाए, न कि मात्र हिरासत को।


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