गुजरात सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- अस्पतालों की हालत कालकोठरी से बदतर

गुजरात सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- अस्पतालों की हालत कालकोठरी से बदतर


24/05/2020  मो रिजवान 


गुजरात हाईकोर्ट ने विजय रूपाणी सरकार को फटकार लगते हुए कहा है कि वो कोरोना से निपटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही। कोर्ट ने सूबे के अस्पतालों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इनकी हालत किसी कालकोठरी से भी बदतर है।



दरअसल, हाईकोर्ट में कोरोना मामलों के बीच अस्पतालों की बदहाली को लेकर एक जनहित याचिका दर्ज की गई थी। इसी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य की विजय रूपाणी सरकार को जमकर फटकार लगाई। जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस इलेश वोरा की बेंच ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में कोरोना के मामलों को ‘कृत्रिम रूप से नियंत्रित’ करने की कोशिश की जा रही है।


साथ ही बेंच ने अपनी टिप्पणी में अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को एक कालकोठरी से भी बदतर बताया। बेंच ने कहा कि यह काफी निराशा और पीड़ा वाली बात है कि सिविल अस्पताल में ऐसे हालात हैं। हमें ये बहुत निराशा के साथ राज्य को कहना पड़ रहा है कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल बहुत बुरी हालत में है। मरीजों के इलाज वाले अस्पतालों की हालत किसी कालकोठरी या तहखाने से भी बदतर लग रही है।


दोनों जज यहीं नहीं रुके। गुजरात सरकार पर तंज कसते हुए बेंच ने स्वास्थ्य सेवाओं की हालत डूबते हुए टाइटैनिक से कर दी। बेंच ने याचिका पर सुनवाई के दौरान रूपाणी सरकार को जल्द से जल्द कोरोना मरीजों के इलाज और फैसिलिटी के इंतजामों में सुधार के निर्देश दिए।


बता दें कि गुजरात में अब तक कोरोना से 829 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 377 मौतें अकेले सिविल हॉस्पिटल में ही हुई हैं। यानी एक अकेले अस्पताल में ही राज्य की 45 फीसदी मौतें हुई हैं। गुजरात कोरोना संक्रमण के मामले में देश में तीसरे नंबर पर है।


Featured Post

क्या डीडीए 1991 में संसद के बनाए हुए 'वर्शिप एक्ट' को नहीं मानता है? 'मस्जिद टूटने की चीखें नहीं सुनाई देती : इमरान प्रतापगढ़ी

नई दिल्ली दिल्ली के महरौली इलाके में एक मस्जिद पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बीती 30 जनवरी को गैरकानूनी ढांचा बताते हुए बुलडोजर चला द...