प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली / पटना
बिहार में छात्र-छात्राओं के लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन पर हुए बर्बर पुलिसिया दमन के खिलाफ आज संसद के लोकसभा में जोरदार आवाज उठाई गई। बिहार के विभिन्न शैक्षणिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे 700 से अधिक छात्र-छात्राओं पर हुए बर्बर लाठीचार्ज, गोलीबारी और फर्जी मुकदमों को लेकर केंद्र व बिहार सरकार को आड़े हाथों लिया गया।
संसद में यह विषय उठाते हुए स्पष्ट रूप से मांग की गई कि पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष शांतनु, माननीय विधायक संदीप सौरभ जी तथा माननीय पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव जी समेत गिरफ्तार किए गए सभी बच्चों और जनप्रतिनिधियों की अविलंब एवं बिना शर्त रिहाई की जाए।
प्रमुख बिंदु एवं मांगें:
STF की तैनाती पर कड़ा विरोध: यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए राज्य सरकार ने विशेष कार्य बल (STF) को लगा दिया। सरकार से सीधा सवाल है—क्या वे निर्दोष बच्चे आतंकवादी थे या दुर्दांत अपराधी?
सरकार की कार्यशैली पर सवाल: छात्रों के न्यायपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए जिस प्रकार का बल प्रयोग किया गया, उससे राज्य सरकार का दमनकारी चेहरा उजागर होता है। बिहार समेत पूरे देश की जनता यह देख रही है कि सत्ता में बैठे लोग युवाओं और विद्यार्थियों को किस नजरिए से देखते हैं।
व्यापक आंदोलन की चेतावनी: यदि गिरफ्तार किए गए छात्र प्रतिनिधियों, विधायकों और पूर्व मंत्री की अविलंब रिहाई नहीं की जाती है तथा दर्ज फर्जी मुकदमे वापस नहीं लिए जाते हैं, तो इसके विरोध में पूरे बिहार में व्यापक जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।
शिक्षा और रोजगार की बात करने वाले युवाओं पर यह बर्बरता लोकतंत्र पर सीधा हमला है। न्याय मिलने तक यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से जारी रहेगी।
