शास्त्री पार्क-न्यू उस्मानपुर में DDA की जमीन पर कथित अवैध पार्किंग, ट्रैफिक पुलिस ने खोला मोर्चा
नई दिल्ली, नीरज अवस्थी। पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क और न्यू उस्मानपुर इलाके में सरकारी जमीन और सड़कों पर कथित रूप से चल रही अवैध पार्किंग के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। यातायात पुलिस के निरीक्षण में सरकारी जमीन पर पार्किंग संचालित होने की बात सामने आने के बाद संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। पुलिस ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली नगर निगम के संबंधित विभागों से संयुक्त जांच कर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
DDA की जमीन पर पार्किंग, अब दस्तावेजों की होगी जांच
यातायात पुलिस के अनुसार, न्यू उस्मानपुर थाने के पास डीडीए की जमीन और सड़क तथा पांचवें पुश्ते के आसपास सरकारी जमीन पर कई स्थानों पर पार्किंग संचालित होने की जानकारी मिली। क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद यातायात पुलिस ने मामला संबंधित विभागों के संज्ञान में पहुंचाया।
पुलिस ने पार्किंग संचालकों को भी नोटिस जारी कर पार्किंग संचालन की अनुमति और उससे जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यदि संचालक वैध अनुमति नहीं दिखा पाते हैं तो संबंधित विभागों की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
कई नामों का पत्र में उल्लेख
यातायात पुलिस की ओर से डीडीए और निगम को भेजे गए पत्र में अभिराज तिवारी, ओमसेन, नीतू, प्रिंस ढेढ़ा, महेश सहित अन्य लोगों के नाम का उल्लेख करते हुए सरकारी जमीन पर कथित अवैध पार्किंग संचालन का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने दोनों विभागों से मामले की संयुक्त जांच और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
सरकारी जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर लंबे समय से पार्किंग का संचालन किया जा रहा है। उनका दावा है कि सरकारी जमीन का कथित व्यावसायिक इस्तेमाल कर निजी तौर पर कमाई की जा रही है, जबकि सरकारी खजाने को संभावित राजस्व नुकसान हो रहा है। स्थानीय निवासियों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि जमीन सरकारी है तो वहां लंबे समय से पार्किंग जैसी व्यावसायिक गतिविधियां किसकी अनुमति से चल रही हैं।
बसों के ठहराव पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने सरकारी जमीन पर कथित रूप से पंजाब रोडवेज और अन्य निजी बसों के ठहराव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि न्यू उस्मानपुर के पांचवें पुश्ते के आसपास सरकारी जमीन पर पार्किंग और वाहनों के ठहराव की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं तथा पूर्व में भी सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायतें सामने आती रही हैं।
अब DDA और MCD की कार्रवाई पर नजर
यातायात पुलिस का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित भूमि एवं नागरिक निकाय विभागों की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई के दौरान यातायात पुलिस आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी। अब यातायात पुलिस की पहल के बाद निगाहें डीडीए और निगम की कार्रवाई पर टिक गई हैं।
सवाल सीधा है—अगर जमीन सरकारी है तो वहां पार्किंग का संचालन किसकी अनुमति से हो रहा था और इससे होने वाली कमाई का हिसाब किसके पास है? जांच के बाद ही इन आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
