लॉक डाउन के चलते, दिल्ली मे यमुना दिख रही है साफ।


समस्त भारत में लॉक डाउन जारी है जिसके चलते तमाम फैक्ट्रियां कारखाने बंद हो गए हैं। हजारों लाखों लोगों का रोजगार भी खत्म हो गया है। राजधानी दिल्ली के अंदर तमाम फैक्ट्री और कारखानों का वेस्ट मटेरियल यमुना नदी में डाला जाता है।



फैक्ट्रियों और कारखानों की सारी गंदगी यमुना नदी में डाल दी जाती है। यह एक बहुत बड़ा कारण है कि यमुना नदी के अंदर पानी बहुत गंदा और कूड़ा नजर आता है। हालांकि सरकार यमुना साफ करने के लिए काफी कार्य कर रही है परंतु अंत में सरकार असमर्थ दिखती है।


दिल्ली के अंदर यमुना नदी बहुत दूषित नदी दिखाई पड़ती थी। परंतु लॉक डाउन के बाद मानो की प्रकृति में एक नई बहार आ गई है। बात की जाए अगर दिल्ली से बह रही यमुना की तो आज के समय यमुना के नजारे बहुत अलग हैं। नॉक डाउन से पहले यमुना का पानी देखने में नाले के पानी जैसा था और बहुत भारी मात्रा में कीचड़ और कूड़ा यमुना में देखने को मिलता था।



परंतु लॉक डाउन के बाद दिल्ली में फैक्ट्री और कारखाने बंद होने के बाद नदी के अंदर कूड़ा करकट नहीं डाला जा रहा है जिसके बाद यमुना नदी का पानी काफी साफ देखने को मिला। 


लॉक डाउन के चलते सड़कों पर भी लोगों की भीड़ गाड़ियां कम नजर आ रही हैं जिसके चलते शहर की वायु में काफी गुणवत्ता देखने को मिल रही है। जिसका फायदा अस्थमा के मरीजों को हो रहा है। अस्थमा के मरीजों को सास की कोई भी परेशानी खासा देखने को नहीं मिल रही है। 


लोक डाउन के चलते देश के कई राज्यों के अंदर जंगली जानवर भी सड़कों पर देखे गए हैं हरिद्वार की सड़क पर बारहसिंघा नीलगाय वह नोएडा जो दिल्ली एनसीआर में आता है जीआईपी मॉल के बाहर नीलगाय को देखा गया है। इस सब परिस्थितियों के चलते यह कहा जा सकता है कि प्रकृति इंसान के करीब आ गई है।


अब देखने वाली बात यह होगी कि लोग नाम खुलने के बाद लोग इस सुधरी हुई हवा और पानी को कितने समय तक स्वच्छ और साफ रख सकते हैं।


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