महाराष्ट्र पालघर घटना: मानवाधिकार आयोग ने सूबे के पुलिस प्रमुख को भेजा नोटिस

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*आशू यादव की खास रिपोर्ट SUB Bureau Chief Kanpur*
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     *भ्रष्टाचार और जुर्म के खिलाफ हर पल आपके साथ*



*महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं समेत 3 लोगों की लिंचिंग के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सूबे के पुलिस प्रमुख को नोटिस भेजा है। इस घटना को लेकर शुरू से ही पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। इस पूरी घटना को पुलिस के आंखों के सामने ही अंजाम दिया गया था और अब महाराष्ट्र के पुलिस प्रमुख को इस पूरे मामले को लेकर एनएचआरसी को जवाब देना होगा।




*दरअसल, बीते हफ्ते महाराष्ट्र के पालघर जिले में भीड़ द्वारा हुई साधुओं की हत्या की हर कोई निंदा कर रहा है। इस अमानवीय घटना के बाद पूरा साधु समाज गुस्से में बौखला गया है और वे दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने की मांग कर रहा है। राज्य के सीएम उद्धव थाकरे ने बयान दिया था कि सभी आरोपियों की घटनास्थल पर ही गिरफ्तारी की जा चुकी है।*


*जहां पूरा देश इस घटना की निंदा कर रहा है, वही सेक्युलर गैंग सन्नाटे है। दो संतो की हत्या हो बग लेकिन किसी ने चू तक न की। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या हिंदुस्तान में हिन्दू होना पाप है? और अगर उद्धव ठाकरे ने घटना वाले दिन ही गिरफ़्तारी कर ली थी तो 4 दिनों तक उन्होंने इतनी बड़ी बात को देश से क्यों छुपाई?*



*पालघर में दो संतों कल्पवृक्ष गिरि और सुशील गिरि की हत्या हो गई, क्या उनके कपड़े भगवा थे इसलिए आपको गुस्सा नहीं आ रहा है? जैसे दो संतों को मारा गया, अगर वैसे ही अगर किसी मौलवी को मारा जाता या किसी पादरी को मारा जाता तो क्या महाराष्ट्र सरकार ऐसे ही खामोश रहती? क्या हिंदुओं को इस देश की सबसे कमजोर कौम मान लिया गया है ? सैकेड़ों लोगों ने संतों को मार डाला, लेकिन इंडिया गेट पर कोई मोमबत्ती नहीं जला रहा है? कोई अवार्ड वापस करने नहीं आ रहा है क्या संत इंसान नहीं होते? पहलू खान, अखलाक , तबरेज की हत्या हमारे समाज पर धब्बा है इनके हत्यारों को हम माफ नहीं करेंगे, तो फिर इन दो संतों ने क्या गलती की थी उनकी हत्या पर चुप्पी क्यों?*


*जो लोग कहते थे कि झारखंड में मुस्लिम युवक को पीटकर डाला, वो आज कह रहे हैं कि संतों को मार डाला। ये क्यों नहीं कहते कि 2 हिंदुओं को मार डाला? मेरे देश की पुलिस किसी को मारती नहीं मदद करती है, पालघर में जो लोग थे वो नेताओं के पैसे पर पलने वाले लोग थे पुलिस नहीं। उना केस में मायावती ने कहा था ये दलितों को नहीं मुझे पीटा गया है। क्या संतों की हत्या पर मायावती जी मुंह क्यों सिल लिया है?*