कानपुर नगर निगम में आउटसोर्सिंग से निराश कर्मचारियों का बवाल।

 कानपुर 


यूं तो सरकारी संस्थानों में आउटसोर्सिंग का चलन समय के साथ बढ़ता जा रहा है इससे सरकारी नौकरियों का अभाव हो रहा है तो वहीं कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं को भी काम किया जा रहा है। इन समस्याओं को देखते हुए कई महत्व के अंदर कर्मचारी अपना रोष जताते हैं धरना प्रदर्शन करते हैं। 



इतनी समस्याओं के चलते कानपुर नगर निगम में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया इन प्रदर्शनकारियों में हरि ओम वाल्मीकि ने जानकारी दी कि नगर निगम में कंपनियों के टेंडर लोड हुए हैं जिससे नए कर्मचारियों को रखा जाएगा और हमें उससे आपत्ति है। 


फेस अटेंडेंस की भी खिलाफत करी उनका कहना है की फेस अटेंडेंस के चलते वेतन में विलंब होता है समय पर वेतन नहीं आ पाता पहले से ही जिस कंपनी को टेंडर मिला है सफाई कर्मचारी वह दे रही है इसके चलते नई कंपनियां को टेंडर देकर निजीकरण को बढ़ावा देना है। ‌


वही किशनलाल ने बताया कि निगम आयुक्त की मंशा ठीक नहीं दिख रही है यदि निगम आयुक्त ने निजीकरण को बढ़ावा दिया तो उनके खिलाफ वार्ता के बाद प्रदर्शन किया जाएगा। 



रमाकांत मिश्रा कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया पहले केवल कर्मचारियों को आउटसोर्स किया जा रहा था पर अब आउटसोर्सिंग में अन्य चीजों को भी डाला जा रहा है जो कर्मचारी के खिलाफ रहेगा साथ ही कई खामियां नगर निगम में है। जो पैसा आता है राजवित्त का वह पैसा दूसरी चीजों में अधिकारी खर्च कर देते हैं। 

कर्मचारियों के नेता सतीश और असलम अली शाह ने भी निजीकरण पर रोष जताया हैं उनका साफ़ तौर पर कहना है अधिकारी द्वारा चलाई जा रही योजनाएं भ्रष्टाचार में लिप्त है जिस कारण कर्मचारियों को उनका हक अधिकार नहीं मिल पाता यदि कर्मचारियों के अधिकारों को नजरअंदाज किया जाएगा तो प्रदर्शन होगा और निजीकरण से अधिकारों का भी नुकसान है। 

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