भोजन वितरण की गुणवत्ता पर सवाल! क्या है सच?


दिल्ली उत्तर पूर्वी क्षेत्र नंद नगरी:- 


लॉक डाउन के बाद राज्य की सरकारें जरूरतमंद लोगों को खाना मुहैया करवाने का प्रयास लगातार कर रही है। अगर बात की जाए राजधानी दिल्ली की तो यह पाया गया है कि दिल्ली के तकरीबन सभी सरकारी स्कूलों के अंदर जरूरतमंद लोगों को खाना मुहैया कराया जा रहा है।



प्रत्येक स्कूल से सैकड़ों की तादात में लोग भोजन प्राप्त करते हैं। इसके चलते कई शिकायतें ऐसी भी आए हैं जिनमें लोगों का कहना था की जो भोजन सरकार उनको मोहिया करवा रही है उसकी गुणवत्ता बहुत खराब है। लोगों का तो यहां तक कहना था कि 1 किलो दाल को 5 किलो बनाया जाता है और जो चावल दिए जाते हैं उसमें पानी काफी अधिक मात्रा में डाल दिया जाता है। 



क्योंकि इस पूरे समीकरण में खाना प्रत्येक सेंटर में तोल के दिया जाता है जिस पर लोगों ने कहा कि खाने का वजन बढ़ाने के लिए अधिक पानी का प्रयोग किया जाता है। जिसके बाद एंटी करप्शन इंडिया की टीम क्षेत्र में भोजन बन रहे स्थल पर पहुंची और सच्चाई का पता लगाया।


नंद नगरी समुदाय भवन बी ब्लॉक में जरूरतमंद लोगों के लिए भारतीय मानव कल्याण परिषद द्वारा खाना बनाया जाता है जिन्हें डीएम शाहदरा से बल्क आर्डर का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। तफ्तीश पर यह पता लगा की जो खाने की गुणवत्ता है वह खराब नहीं है। भारतीय मानव कल्याण परिषद के सदस्य ने बनी हुई दाल और चावल की गुणवत्ता दिखाई और वहां मौजूद लोगों से भी हमने बातचीत कर सच्चाई जानी जिस पर मौजूदा लोगों ने कहा कि उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है। हां बस यह सच है कि 30 दिन से सुबह शाम चावल ही खाने को मिल रहा है।