कानपुर
कई सरकारी महाकों में भ्रष्टाचार की कहानी हम और आप सुनते चले आ रहे हैं उनमें से एक उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर का कानपुर विकास प्राधिकरण (के. डी . ए.) मालूम पड़ता है। जिसमें एक पीड़ित का आरोप है कि 2019 में वह एक जमीन को लेकर मुकद्दमा जीता इसके बाद कानपुर विकास प्राधिकरण उस पर काम करने में असमर्थ दिखाई दे रहा है।
दरअसल पीड़ित योगेंद्र पाल ने जानकारी देते हुए बताया 2019 में वह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से मुकद्दमा जीते थे जिसमें उनकी जमीन जो 580 वर्ग मीटर की है वह बुकिंग में घोषित थी परंतु मुकद्दमा जीतने के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण उनका कब्जा दिलवाने में असमर्थ है क्योंकि उसे जमीन को कानपुर विकास प्राधिकरण ने किसी दूसरे व्यक्ति को अलॉट कर दी है।
यदि योगेंद्र पाल अपनी जमीन पर जाते हैं तो जिस व्यक्ति को इसलिए जमीन अलाउड की गई है वह उपद्रव की स्थिति पैदा करता है। योगेंद्र पाल का कहना है कि 2019 से अब तक अधिकारियों से बातचीत करता चला आ रहा हूं पर 10 दिन का समय लेते-लेते कई वर्ष बीत गए परंतु कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
पीड़ित योगेंद्र का कहना है कि मैं सुबह के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कानपुर मंडल के कमिश्नर से मुलाकात करूंगा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जीतने के बावजूद भी आखिर क्यों कानपुर विकास प्राधिकरण उनकी जमीन पर कब्जा नहीं दिलवा पा रहा है और ना ही लिखित में कोई कागज उन्हें दिया जा रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी की क्या कानपुर विकास प्राधिकरण हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी नहीं मान रहा है या फिर इसके पीछे कोई अन्य मामला छुपा हुआ है?
